दिङ्खानिरोध और अरियासक्कम के सिद्धांत The Buddha’s First Teaching หน้า 214
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สรุปเนื้อหา

इस पाठ में दिङ्खानिरोध और अरियासक्कम जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ये अनुस्सतेधर्मों के ज्ञान की परिकल्पना करते हैं। ये उपदेश भिक्षुओं के लिए मार्ग दर्शाते हैं जिसमें ज्ञान, पाण्णा, विण्जा और आलोक की आवश्यकता होती है। पाठ में उल्लिखित अवधारणाएँ भौतिक और आध्यात्मिक दोनों पहलुओं में महत्वपूर्ण हैं, जो भिक्षुओं को उनके अनुसरण के लिए प्रेरित करती हैं। इस आध्यात्मिक यात्रा में, वे ज्ञान की गहराई और अनुस्सते धर्मों की समझ को विकसित करने के लिए आह्वान करते हैं।

หัวข้อประเด็น

-दिङ्खानिरोध के सिद्धांत
-अरियासक्कम का महत्व
-धम्म का ज्ञान
-भिक्षुओं के लिए उपदेश
-आध्यात्मिक यात्रा

ข้อความต้นฉบับในหน้า

<3.7.2> तम् क्षो पाण्डाम् दिङ्खानिरोध् अरियासक्कम् सकchi-कत्तबन्ति मे भिख्खव; पुबे अनानुस्सतेसु धम्मेसुैक्खुम् उडपाडि णानम् उडपाडि पाण्णा उडपाडि विण्जा उडपाडि अालोक उडपाडि. <3.7.3> तम् क्षो पाण्डाम् दिङ्खानिरोध् अरियासक्कम् सकchiकत्तानि मे भिख्खव; पुबे अनानुस्सतेसु धम्मेसुैक्खुम् उडपाडि णानम् उडपाडि पाण्णा उडपाडि विण्जा उडपाडि अालोक उडपाडि. <3.8.1> “इदम् दिङ्खानिरोध्गामिनि पटीपड़्आ अरियासक्कानि मे भिख्खव; पुबे अनुस्सतेसु धम्मेसुैक्खुम् उडपाडि णानम् उडपाडि पाण्णा उडपाडि विण्जा उडपाडि अालोक उडपाडि. <3.8.2> तम् क्षो पाण्डाम् दिङ्खानिरोध्गामि पटीपड़्आ अरियासक्कम् भवेत्तबन्ति मे भिख्खव; पुबे अनुस्सतेसु धम्मेसुैक्खुम् उडपाडि णानम् उडपाडि पाण्णा उडपाडि विण्जा उडपाडि अालोक उडपाडि. <3.8.3> तम् क्षो पाण्डाम् दिङ्खानिरोध्गामि पटीपड़्आ अरियासक्कम् भवेत्तबन्ति मे भिख्खव; पुबे अनुस्सतेसु धम्मेसुैक्खुम् उडपाडि णानम् उडपाडि पाण्णा उडपाडि विण्जा उडपाडि अालोक उडपाडि.
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